चंद लम्हों की है यह जिंदगी दोस्तों बेर में का बिखर जाए दोस्तों ए पागल ज़रा संभल भी जा किस उम्मीद मैं जी रहा हैं तू इंसान हूं कहा उसने मायूसी नही समझता आशा की किरण हर सवेरे इस धरती को रोशन करती है आँख खोल के देख ज़रा इंसानियत का जनाजा अभी उठा नही है है उम्मीद एक सच्चे दिन की ना हो किसी से बेर ना हो यह दुश्मनी बहती है हार शरीर से वो लाल बस नाम अलग दिए है बनाया था खुदा ने यह जहान इंसानों ने इसमें हैवानियत भर दी एक नया सवेरा होगा कल फिर से आशा की किरन फिर आएगी मन की आंखें भी खोल के देखो जल ना जाए यह जहान हमारा
है जिंदगी तू मुझे बता, यह कैसी दुविधा में तूने मुझे है डाला राह में चुनूं तो कौन सा, एक तरफ है खाई तो दूसरी तरफ हैं कुआ। कुछ कर भी नही सकता, ना कुछ किए बिना बैठा जाता खुद को संभालूं या किसी का सहारा बनूं है जिंदगी अब तू ही बता किस राह पे मैं चलूं। अनजाने भी प्यारे लगते है और वो जान के भी अनजान बने फिरते है करे तो हम क्या जब सांस लेने के लिए संघर्ष करते है चंद लम्हे और है इस जीवन मैं, अब तू ही बता लाचार और बेबस तो हम पहले भी थे अब तो उम्मीद ने भी मुंह फेर लिया भटकते हुए मुसाफिर है हम हवा की रुख पे चल देंगे कुछ और कदम आवाज़ बहरों को सुनाई नही देता ना अंधों को कुछ दिखाई देता यह भूत है लातों के, इन्हे प्यार से कुछ नही समझता है जिंदगी अब तू ही बता। चंद सिक्कों की लालच, कुछ और देर सत्ता का नशा बेच दिया कौड़ियों में, इंसानों ने ही इंसानों को है जिंदगी अब कुछ ना बता।