जिंदगी तू ही बता
है जिंदगी तू मुझे बता,
यह कैसी दुविधा में तूने मुझे है डाला
राह में चुनूं तो कौन सा,
एक तरफ है खाई तो दूसरी तरफ हैं कुआ।
कुछ कर भी नही सकता, ना कुछ किए बिना बैठा जाता
खुद को संभालूं या किसी का सहारा बनूं
है जिंदगी अब तू ही बता
किस राह पे मैं चलूं।
अनजाने भी प्यारे लगते है
और वो जान के भी अनजान बने फिरते है
करे तो हम क्या जब सांस लेने के लिए संघर्ष करते है
चंद लम्हे और है इस जीवन मैं, अब तू ही बता
लाचार और बेबस तो हम पहले भी थे
अब तो उम्मीद ने भी मुंह फेर लिया
भटकते हुए मुसाफिर है हम
हवा की रुख पे चल देंगे कुछ और कदम
आवाज़ बहरों को सुनाई नही देता
ना अंधों को कुछ दिखाई देता
यह भूत है लातों के, इन्हे प्यार से कुछ नही समझता
है जिंदगी अब तू ही बता।
चंद सिक्कों की लालच, कुछ और देर सत्ता का नशा
बेच दिया कौड़ियों में, इंसानों ने ही इंसानों को
है जिंदगी अब कुछ ना बता।
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